आदर्श विद्या मंदिर सुजानगढ़

(Adarsh Vidya Mandir Sujangarh)

विद्या भारती एक परिचय

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान भारत का सबसे बड़ा अशासकीय शैक्षिक संगठन है, जिसका शुभारम्भ वर्ष 1952 में गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) में प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना से हुआ। आज यह संगठन 31 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों, 623 से अधिक जिलों तथा देश के हजारों नगरों एवं ग्रामों में अपनी शिक्षा सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहा है। वर्तमान में विद्या भारती के अंतर्गत 12,791 औपचारिक विद्यालय, 12,654 अनौपचारिक शिक्षा केंद्र, 63 महाविद्यालय, 45 आवासीय एवं 240 अर्ध-आवासीय शिक्षण संस्थान संचालित हैं। इन संस्थानों में लगभग 32.50 लाख विद्यार्थी एवं अनौपचारिक शिक्षा केंद्रों में 2.45 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनके सर्वांगीण विकास के लिए 1.60 लाख से अधिक आचार्य एवं शिक्षाकर्मी समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। विद्या भारती का ध्येय केवल औपचारिक शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों, राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन एवं चरित्र निर्माण पर आधारित ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिससे शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूर्ण विकसित, आत्मविश्वासी, संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार हों। इसके विद्यालयों में आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ योग, संस्कृत, संगीत, खेलकूद, नैतिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान मेले, बाल सभाएँ, सेवा परियोजनाएँ, सामाजिक समरसता, मातृ-पितृ पूजन, गुरु वंदन, राष्ट्रीय पर्व, सांस्कृतिक उत्सव एवं व्यक्तित्व विकास जैसे विविध कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली पंचकोशीय विकास, मातृभाषा आधारित शिक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के समन्वय पर आधारित है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, संस्कार, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित की जाती है। समाज के सहयोग से संचालित यह संगठन स्थानीय प्रबंध समितियों, अभिभावकों, पूर्व छात्रों एवं शिक्षाविदों की सक्रिय सहभागिता से शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा है और आज देश के सर्वाधिक विश्वसनीय एवं प्रभावी शैक्षिक संगठनों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है।